अपन के गुरदेव तो बजरंग बली

सच पूछिये जिंदगी में कोई लौकिक गुरु नहीं मिला, न ही किसी को गुरू बनाने का कभी ख्याल आया. अलबत्ता पहली से एमएससी तक और पत्रकारिता में शिक्षक मिले, प्रेरक मिले, अगुवा मिले पर ज्यादातर गुरु नहीं गुरू निकले. READ MORE
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