डियर जिंदगी : रो लो, मन हल्‍का हो जाएगा!

हमारे यहां तो रोना सहज अभिव्‍यक्ति रही है. रोने से मन हल्‍का होता है. ऐसा हम बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन कुछ अधिक शहरी होते ही, हमारे मिजाज में कठोरता ऐसी घुली कि हंसना तो टीवी, मोबाइल के सहारे बढ़ गया, लेकिन रोकर मन के मैल को साफ करने का चलन छूट गया है. READ MORE
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