ऐसे अनेक उदाहरण हमें मिलते हैं, जिसमें गांधीजी ने अपने कदम वापस खीचे हैं और उसके युगांतरकारी परिणाम सामने आये हैं. इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण चौरा-चौरी कांड के बाद आन्दोलन का वापस ले लिया जाना है. यहाँ वे स्वीकारते हैं कि भारत अभी उनकी तरह से स्वतंत्रता पाने के लायक नहीं बन पाया है. READ MORE
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