क्या खबरें पत्रकारों के खून से लिखी जाएंगी

यह पत्रकार ही होते हैं जो बहुमत की लानत-मलामत झेलने के बाद भी नक्सली और आतंकवादियों तक के मानवाधिकार की बात करते हैं. उनका पेशा ही ऐसा है कि उन्हें अंतत: मानवता के साथ खड़ा होना पड़ता है.  READ MORE
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